भारत–नाटो तनाव: समकालीन परिप्रेक्ष्य
भारत–नाटो तनाव: समकालीन परिप्रेक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय पृष्ठभूमि नाटो (North Atlantic Treaty Organization) पारंपरिक रूप से यूरोप–अमेरिका आधारित सैन्य गठबंधन है, लेकिन अब उसने अपने दायरे को इंडो‑प्रशांत तक बढ़ाने की पहल की है। हाल ही में नाटो महासचिव मार्क रूते ने भारत, चीन और ब्राज़ील को चेतावनी दी कि रूस के साथ व्यापार जारी रहे तो उन पर 100% सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं | भारत की प्रतिक्रिया: रणनीतिक निर्भरण भारत ने इस धमकी के तुरंत बाद अपनी स्थिति स्पष्ट की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि “दोहरे मापदंड” स्वीकार्य नहीं होंगे और हर देश को समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए Navbharat Times Navbharat Times । ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत की तेल आपूर्ति विविध स्रोतों से सुनिश्चित है और वे प्रतिबंधों से परेशान नहीं हैं । इस प्रतिकूल स्थिति में भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और गुटनिरपेक्ष नीति को कायम रखा है। 🔍 प्रमुख कारण और दृष्टिकोण • गुटनिरपेक्ष नीति की स्थिरता भारत ने कभी भी नाटो के सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनने से इंकार किया है। विदेश मंत्री S. जयश...