पटना हॉस्पिटल शूटआउट
पटना हॉस्पिटल शूटआउट: बिहार की कानून-व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
दिनांक: 17 जुलाई 2025
स्थान: पारस हॉस्पिटल, पटना
घटना का समय: सुबह 7:15 बजे के आसपास
📌 क्या हुआ उस दिन?
17 जुलाई की सुबह, बिहार की राजधानी पटना के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले अस्पतालों में से एक, पारसहॉस्पिटल, में अचानक गोलियों की आवाज़ गूंज उठी। ICU के अंदर इलाजरत अपराधी चंदन मिश्रा को पांच हथियारबंद लोगों ने गोलियों से भून डाला। यह वारदात 30 सेकंड से भी कम समय में अंजाम दी गई और हमलावर बिना किसी रुकावट के अस्पताल से बाहर निकल गए।
🔍 चंदन मिश्रा कौन था?
चंदन मिश्रा बक्सर का एक कुख्यात अपराधी था, जिस पर 24 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें हत्या और अपहरण जैसे आरोप शामिल थे। वह उम्रकैद की सजा काट रहा था और पैरोल पर बाहर आया हुआ था क्योंकि उसे लिवर से जुड़ी बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था।
🛡️ सुरक्षा में भारी चूक
घटना के CCTV फुटेज से साफ़ है कि:
हमलावर बिना किसी बाधा के सीधे ICU में दाखिल हो गए।
अस्पताल की सुरक्षा जांच बेहद ढीली थी – मेटल डिटेक्टर और चेकिंग औपचारिकता मात्र साबित हुई।
किसी भी गार्ड ने हमलावरों को रोका नहीं।
यह सवाल खड़ा करता है कि क्या हमलावरों ने पहले से "रीकी" (सर्वेक्षण) की थी? क्या सुरक्षा में लापरवाही जानबूझकर की गई?
🧑⚖️ प्रशासन और जांच
बिहार पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की और कुछ संदिग्धों को हिरासत में भी लिया है। तौसीफ नामक शख्स को मास्टरमाइंड माना जा रहा है, जिसके चंदन मिश्रा से पुराने गेंग राइवलरी संबंध बताए जा रहे हैं। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि अस्पताल स्टाफ में कोई मिला हुआ था या नहीं।
👨👩👧👦 परिवार की प्रतिक्रिया
चंदन मिश्रा के परिजनों ने घटना को राजनीतिक साजिश बताया है और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि "अगर सरकार किसी को जेल में सुरक्षित नहीं रख सकती, तो आम नागरिक का क्या?" उनकी भावनात्मक प्रतिक्रिया ने पूरे सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।
🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया
तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा, "बिहार में अब अस्पताल भी सुरक्षित नहीं रहे। ये कैसा जंगलराज है?"
कांग्रेस और अन्य दलों ने राष्ट्रपति शासन की मांग तक कर डाली।
सरकार की प्रतिक्रिया: उन्होंने इसे "गंभीर सुरक्षा विफलता" बताया और आश्वासन दिया कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
📊 व्यापक समीक्षा: क्या सुधरेगी सुरक्षा?
इस घटना ने बिहार की लचर सुरक्षा व्यवस्था, अपराधियों के पैरोल misuse, और VIP सुविधा प्राप्त बंदियों की हकीकत सामने रख दी है। सवाल ये है:
क्या अस्पतालों में VIP बंदियों के इलाज का तरीका बदलना होगा?
क्या हर अस्पताल को हाई-सिक्योरिटी ज़ोन घोषित किया जाना चाहिए?
क्या पुलिस को जिम्मेदारी लेने से बचना चाहिए?
✍️ निष्कर्ष
यह केवल एक अपराध नहीं था — यह एक सिस्टम पर हमला था। पटना के सबसे बड़े निजी अस्पताल में हुई इस शूटिंग ने राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासन की तत्परता और सुरक्षा मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब केवल गिरफ्तारी नहीं, व्यवस्था में सुधार ही जनता की माँग है।
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